वाराणसी- उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आशुतोष सिन्हा ने वाराणसी स्थित एक ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की पुरजोर मांग की है। इस संबंध में उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक आधिकारिक पत्र भेजकर एलटी कॉलेज परिसर स्थित ‘गोपाल लाल विला’ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश की है।
स्वामी विवेकानंद से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत –
पत्र में विधायक सिन्हा ने उल्लेख किया है कि युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद ने वाराणसी प्रवास के दौरान अस्सी स्थित गोपाल लाल विला में 39 दिनों तक निवास किया था। यह वही स्थान है, जहां से विवेकानंद ने काशी में अपने विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया और देश-विदेश में आध्यात्मिक चेतना का संदेश फैलाया।
विधायक ने बताया कि गोपाल लाल जी, स्वामी विवेकानंद के रिश्तेदार थे और उन्होंने ही अपने इस आवास पर उन्हें ठहराया था। आज भी यह भवन विवेकानंद से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का प्रतीक बना हुआ है।

पत्र में आशुतोष सिन्हा ने राज्य सरकार के समक्ष तीन अहम मांगें रखीं:
- गोपाल लाल विला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जाए।
- गोपाल लाल विला के भीतर एक ‘स्वामी विवेकानंद स्मृति केंद्र’ की स्थापना की जाए।
- 12 जनवरी (स्वामी विवेकानंद जयंती) को वाराणसी में राज्य स्तरीय युवा दिवस के रूप में भव्य आयोजन किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि काशी के जिला पुस्तकालय का नाम बदलकर ‘स्वामी विवेकानंद पुस्तकालय’ रखा जाए।
व्यापक समर्थन –
पत्र पर कई अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों के हस्ताक्षर भी हैं, जिनमें रामसूरत राजभर (पूर्व सांसद), डॉ. ओमप्रकाश सिंह (पूर्व मंत्री), अमीश पटेल (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष – सपा छात्रसभा) जैसे नाम शामिल हैं, जो इस मांग को जनभावना से जुड़ा मुद्दा मानते हैं।
सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद –
स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों से जुड़े स्थलों को संरक्षित करने और युवा पीढ़ी को उनसे जोड़ने के उद्देश्य से की गई यह पहल अब जनपद स्तर से प्रदेश स्तर तक चर्चा का विषय बन रही है। जनप्रतिनिधियों ने आशा जताई है कि उत्तर प्रदेश सरकार जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी।


