सोनभद्र- कहते हैं इंसाफ की राह आसान नहीं होती… लेकिन अगर इरादा मजबूत हो, तो इंसाफ खुद रास्ता ढूंढ लेता है। ऐसा ही कुछ हुआ उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में, जहां महज़ 13 साल की एक मासूम बच्ची ने अपनी मां को अंधविश्वास और अत्याचार से बचाने के लिए 13 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर थाने तक पहुंची। इस बच्ची की बहादुरी पुलिस ही नहीं, पूरे इलाके के लोगों के लिए मिसाल बन गई है। आइए देखते हैं हमारी ये खास रिपोर्ट…
सोनभद्र के दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के बरहपान गांव से निकलकर ये 13 साल की मासूम 13 किलोमीटर पैदल चली, न थकान रोकी, न डर… क्योंकि उसकी झोली में था बस एक सपना – मां को इंसाफ दिलाने का..
आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली बिमला ने थाने पहुंचकर कहा – ‘साहब, मेरी मां को मेरी चाची डायन कहती है… गालियां देती है और मारती है… जब मैंने विरोध किया, तो मुझे भी पीटा गया।
बच्ची की बात सुनकर पुलिस भी हैरान रह गई। थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बच्ची की हिम्मत की सराहना की और तुरंत मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी।
एडिशनल एसपी त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी ने कहा – बच्ची की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
आज भी कई गांवों में अंधविश्वास का ज़हर रिश्तों को निगल रहा है। इस बच्ची की चाची ने उसकी मां को ‘डायन’ बताकर उसे प्रताड़ित किया – शारीरिक रूप से भी, मानसिक रूप से भी।
“लेकिन इस बच्ची ने साबित कर दिया – इंसाफ के लिए उम्र नहीं, हिम्मत चाहिए होती है। जब बड़े खामोश हो जाएं, तब छोटे भी आवाज़ उठा सकते है ।
ये सिर्फ एक बच्ची की कहानी नहीं है… ये समाज के उस अंधेरे कोने की कहानी है, जहां आज भी ‘डायन’ जैसे शब्द औरतों के खिलाफ ज़हर बनकर इस्तेमाल हो रहे हैं। लेकिन उम्मीद की किरण है – एक बेटी की हिम्मत, जो इंसाफ का रास्ता रोशन कर रही है।


